संदेश

Comedy status wallpaper

चित्र

Comedy wallpaper

चित्र

Morning status सुप्रभात स्टेटस

चित्र

Friendship status दोस्ती स्टेटस

चित्र

अमृत वचन

हमारा सम्मान हो ऐसी चाह हमारा अपमान कराती है मुक्ति इच्छा के त्याग से होती है वस्तु के त्याग से नहीं  संसार में कुछ भी चाहोगे तो दुःख पाना ही पड़ेगा किसी वस्तु का सबसे बढ़िया उपयोग है उसे दूसरे के हित में लगाना हम घर में रहने से नहीं फंसते परंतु घर को अपना मानने से फंसते है असत का संग छोड़े बिना सद्संग का प्रत्यक्ष लाभ नहीं है भगवान् में अपनापन सबसे सुगम और श्रेष्ठ साधन है संसार को अपना न माने तो इसी क्षण मुक्ति है किसी तरह भगवान् में लग जायो फिर भगवान् अपने आप संभाल लेंगे ठगना दोष है ठगे जाने में कोई दोष नहीं जिसका स्वभाव सुधर जायेगा उसके लिए दुनिया सुधर जाएगी भगवान् के सिवाय कोई मेरा नहीं है यह असली भक्ति है भोगी व्यक्ति रोगी होता है दुखी होता है दुर्गति में जाता है संसार में आसक्ति का त्याग किये बिना भगवान् में प्रीति नहीं होती लेने की इच्छा वाला सदा दरिद्र ही रहता है  मनुष्य को कर्मों का त्याग नहीं कामना का त्याग करना है श्रेष्ठ पुरुष वही है जो दूसरों के हित में लगा हुआ है याद करो तो भगवान् को याद करो काम कर...

भगवद्गीता के उपदेश

🌴🌴🌸🌸🌸🌱🌸🌸🌸🌴🌴       ।।   श्री कृष्णम शरणं ममः।।      🔴आज का प्रातः संदेश🔴 🌲🌲🌲🌺🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲                                 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। और प्रत्येक मनुष्य को इस समाज में जिंदा रहने एवम अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए एक दूसरे निर्भर रहना पड़ता है। प्रत्येक मनुष्य कभी न कभी दूसरे मनुष्य की सहायता करता अवश्य है। जब दो व्यक्ति कंही साथ बैठते है या साथ रहते है तो उन पर एक -दूसरे का अच्छा या बुरा प्रभाव अवश्य पड़ता है। मनुष्य जिस प्रकार के मनुष्यों के साथ उसके स्वभाव का प्रभाव अवश्य पड़ता है।यदि उसकी संगत बुरे लोगों के साथ है तो वह चाहे जितने अच्छे स्वभाव का हो एक दिन वह बुराई उसके अंदर भी आने लगती है।        और अच्छी संगत में बुरा मनुष्य भी अच्छाई के मार्ग का अनुसरण करने लगता है।       कहते है कि व्यक्ति योगियों के साथ योगी और भोगियो के साथ भोगी बन जाता है।। व्यक्ति को जीवन के अंतिम...

शिक्षाप्रद कहानी

एक तमिल  पुजारी थे-पंडित गोकरण नाथ । लोग उन्हें अत्यंत श्रद्घा एवं भक्ति भाव से देखते थे। वहां मंदिर को कोइल कहा जाता है।  पुजारी प्रतिदिन सुबह कोइल जाते और दिनभर मंदिर में रहते। सुबह से ही लोग उनके पास प्रार्थना के लिए आने लगते। जब कुछ लोग इकट्ठे हो जाते, तब मंदिर में सामूहिक प्रार्थना होती। जब प्रार्थना संपन्न हो जाती, तब पुजारी लोगों को अपना उपदेश देते। उसी नगर में एक गाड़ीवान था। वह सुबह से शाम तक अपने काम में लगा रहता। इसी से उसकी रोजी-रोटी चलती। यह सोचकर उसके मन में बहुत दुख होता कि मैं हमेशा अपना पेट पालने के लिए काम-धंधे में लगा रहता हूं, जबकि लोग मंदिर में जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। मुझ जैसा पापी शायद ही कोई इस संसार में हो। यह सोचकर उसका मन आत्मग्लानि से भर जाता था। सोचते-सोचते कभी तो उसका मन और शरीर इतना शिथिल हो जाता कि वह अपना काम भी ठीक से नहीं कर पाता। इससे उसको दूसरों की झिड़कियां सुननी पड़तीं। जब इस बात का बोझ उसके मन में बहुत अधिक बढ़ गया, तब उसने एक दिन पुजारी के पास जाकर अपने मन की बात कहने का निश्चय किया। अतः वह गोकरण जी के पास पहुंचा...